कुत्ते को गटर से पानी पीता देख शुरू की पहल, अब तक बाँट चुके हैं 25,000 पानी के बर्तन

 13 

पशु-पक्षियों में भी मनुष्यों की भांति प्रेम की भावना होती है । इसीलिए पशु-पक्षी समूह में रहते हैं और प्रकृति के नियमों के अनुसार चलते हैं । अकारण किसी पर हमला नहीं करते ।दैनिक दिनचर्या के ऐसे काम जो मनुष्य नहीं कर सकता पशु सहज भाव में ही कर देते हैं । पालतू पशु-पक्षी भी मनुष्य के साथ प्रेम भाव से बंध जाते हैं और उसके लिए अपनी जान तक न्योछावर कर देते हैं ।आज हम आपको एक ऐसे ही इंसान के बारे में बताएंगे जो जानवरों से बहुत प्रेम करते है। उनका प्रेम भावना अद्भुत है । आइये जानते है उनके बारे में ।

जैन सनी का परिचय ।

जैन सनी कर्नाटक के तुमकुर के रहने वाले है। पेशे से एक फार्मासिस्ट हैं और साथ ही, वह ‘वॉटर फॉर वॉइसलेस‘ अभियान चला रहे हैं। वह 35 वर्ष के है। लगभग सात साल पहले उन्होंने अकेले तुमकुर में इस अभियान की शुरुआत की थी, लेकिन आज यह पहल लगभग दस शहरों तक पहुँच चुकी है। आज इस अभियान के चर्चे लोगों तक आसानी से पहुँच रहे है। दरअसल इस अभियान के तहत वह पशु-पक्षियों के लिए पानी का इंतजाम करते है।

घर-घर जाकर लोगों को घड़े/बर्तन बांटे ।

उन्होंने इस अभियान कि शुरुआत घर-घर जाकर लोगों को घड़े/बर्तन बांटने से की थी, जिनमें लोग अपने घरों के बाहर जानवरों के लिए पानी भरकर रख सकते हैं। आज वह और उनकी टीम लगभग 25000 बड़े-छोटे पानी के बर्तन लोगों को बाँट चुकी है।
ताकि जितना ज्यादा हो सके पशु-पक्षियों के लिए पानी का इंतजाम हो।

बेजुबानों के लिए प्रेम अद्भुत ।

जैन सनी का जानवरों के प्रति प्रेम बहुत है। उनका कहना है कि जानवर अपने मन की व्यथा जाहिर नही कर सकते है। उनके भूख-प्यास को अपना समझ वह निरंतर इस कार्य में लगे हुए है। वह कहते है कि गर्मियों के मौसम में जानवरों के लिए आसानी से पानी उपलब्ध नही होता । इसलिए उनका यह अभियान पशुओं की सेवा के लिए ही है।

अभियान की शुरुआत कैसे हुई ।

लगभग सात साल पहले एक दिन एक कुत्ते के बच्चे का जैन सनी के गाड़ी से एक्सीडेंट हो गया। वह उसे लेकर अस्पताल भी गए लेकिन उसकी जान नहीं बच पाई। इस दुर्घटना से वह अंदर तक हिला गए और वह तीन-चार महीने तक इसे सदमे में ही थे, वह हमेशा सोचते रहते थे कि यह क्या हो गया उनसे ? फिर एक दिन काम पर जाते समय उन्होंने देखा कि एक कुत्ता गटर में से पानी पी रहा है। उस दृश्य को देखकर उन्होंने ठान लिया कि वह इन बेजुबानों के लिए कुछ करेंगे।
उन्होंने सबसे पहले शुरुआत अपने घर से की और एक छोटा-सा मिट्टी का बर्तन पानी से भरकर घर के बाहर रखने लगे। लेकिन यह पर्याप्त नहीं था। इसलिए उन्होंने अपने आस-पड़ोस के घरों में जा-जाकर बर्तन बाँटना शुरू किया और उनसे अनुरोध किया कि वे भी बेजुबानों के लिए पानी भरकर रखें। देखते ही देखते उनकी यह ड्राइव सोशल मीडिया पर भी पहुँच गयी और ज्यादा से ज्यादा लोग उनसे जुड़ने लगे।

लोग अभियान में मदद भी करते है।

उनकी टीम इलाके के हिसाब से पानी के लिए बर्तन बांटती है। उनके पास दो तरह के बर्तन हैं – एक बड़ा, जो वह ज्यादातर जंगल वाले इलाके में रखते हैं क्योंकि वहाँ हाथी, हिरण, गधा जैसे जानवर भी पानी पीते हैं। वहीं छोटा बर्तन रिहायशी इलाकों में रखते हैं, जहाँ कुत्ते, बिल्ली, बकरी आदि पानी पीते हैं। इन बर्तनों को मुफ्त में बाटंने के लिए अभियान से जुड़े कुछ लोग और कुछ दानकर्ता आर्थिक मदद करते हैं।

सभी लोगों को जैन सनी से सीखने की जरूरत है । उनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है । हमें भी बेजुबानों की सेवा करनी चाहिए। प्रकृति के वह भी एक अभिन्न अंग है।

 

 

0Shares