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Success story of Indian Hockey Team : Chak De! India,भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने 41 साल बाद कांस्य पदक जीता

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“चक दे इंडिया” Chak De! India.

हमारे राष्ट्रीय खेल हॉकी ( Hockey India’s national game ) पर आधारित वर्ष 2007 में यश चोपडा ( Yash Chopra) द्वारा बनायीं गयी यह फ़िल्म देख कर शायद ही कोई भारतीय ऐसा हो जिसमे राष्ट्र प्रेम की भावना प्रबल ना हुई हो | यह फिल्म हमे भारतीय हॉकी के कई सारे पहलू दिखाती है जैसे टीम मे अनुशासन का महत्त्व , सीनियर खिलाड़ियों का जूनियर खिलाड़ियों के साथ आपसी तालमेल, खिलाड़ियों मे देश और टीम के लिए कुछ कर दिखाने की भावना इत्यादि और इन्ही के चलते अंत में भारतीय हॉकी टीम जीत हासिल करती है |

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Image/Tokyo2020Twitter

ऐसा ही कुछ इतिहास रचा है भारतीय पुरुष हॉकी टीम (Indian Men’s Hockey Team) ने  जिसने कल दिनांक 5 अगस्त,2021 तोक्यो (Tokyo Olympics) ओलंपिक में कांस्य पदक ( Bronze medal ) अपने नाम कर लिया है। भारतीय टीम ने 41 साल बाद ओलंपिक में पदक हासिल किया है। ओलंपिक के इतिहास में भारतीय पुरुष हॉकी टीम का यह तीसरा कांस्य पदक ( Bronze medal) है। इससे पहले भारत ने 1968 और 1972 में ब्रॉन्ज़ मेडल (Bronze medal ) जीता था और इससे पहले भारत आठ स्वर्ण ( Gold medal) और एक रजत पदक ( Silver medal ) भी जीत चुका है।

41 वर्ष के इंतज़ार के बाद मिली इस ख़ुशी का कोई जवाब नहीं जिसने हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है और टीम का हर खिलाडी मानो जैसे योद्धा की भांति गर्व से शान से खड़ा था, सभी के चेहरे पर ख़ुशी साफ साफ देखी जा सकती थी और उनके जोश के पीछे 130 करोड़ से ज्यादा भारतीयों की ख़ुशी और उत्साह भी भरपूर था

 भारतीय फील्ड हॉकी में आखिरी बार हमने सन 1980 मोस्को ओलम्पिक (Moscow Olympics) में मैडल जीता था ! तब से लेके तोक्यो (Tokyo) तक के सफर में भारतीय हॉकी टीम को कई नाकामियों का सामना करना पड़ा हैं। बीजिंग ओलिंपिक ( Beijing Olympics ) में लिए तो हम भारतीय क्वालिफाई तक नहीं कर सके थे। इतिहास हमारे पक्ष में नहीं था, मगर भारतीय हॉकी टीम के खिलाडी जोश से लबरेज थे। 

समय खत् होते ही जीत हासिल करते ही भारतीय  जहां जश् में डूब गए , वहीं जर्मनी के खिलाड़ी मायूस होकर वहीं बैठ गए। जर्मनी (Germany) ने काफी कड़ी टक्कर दी मगर भारतीय टीम उसपर भारी पड़ी। भारत ने 5-4 से मुकाबला जीता है| खेल के आखिरी चरण में जिस तरह गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने जर्मन के हर हमले को कुंद कर दिया, वह फैन्‍स के जेहन में लंबे समय तक जीवंत रहेगा। जीत के बाद  श्रीजेश (Sreejesh) बहुत ही उत्साहित दिखे |

श्रीजेश ( Sreejesh) ने कई पेनाल्‍टी कॉर्नर्स बचाए। उनका जोशीला अंदाज खेल में खूब दिखायी दिया और आखिर में तो जर्मनी बिना गोलकीपर के खेल रही थी मगर वह भारतीय डिफेंस को तोड़ नहीं सकी। सेमीफाइनल ( Semi final )में वर्ल्‍ड चैम्पियन ( World Champion) बेल्जियम को शुरुआती तीन क्वार्टर में कड़ी चुनौती देने के बावजूद टीम 2-5 से हार गई। हालांकि उस हार से मिले सबक ने जर्मनी के खिलाफ टीम को मजबूती दी।

जर्मनी (Germany )ने बेहद तेज शुरुआत की लेकिन पूरी मैच में बरकरार नहीं रख सकी। पहले क्वार्टर में उसका दबदबा था तो भारतीय टीम ने बाकी तीन क्वार्टर बाजी मारी।जैसे  ही जर्मनी चूका, भारतीय खिलाड़ियों ने बड़ी होशियारी के साथ मौके का फायदा उठाया | भारतीय टीम 1980 मास्को ओलिंपिक ( Moscow Olympics) में अपने आठ गोल्‍ड मेडल्‍स ( Gold medals) में आखिरी मेडल जीतने के 41 साल बाद कोई ओलिंपिक मेडल जीती है।

वैसे तो पूरी टीम ने धमाकेदार खेल का प्रदर्शन किया लेकिन श्रीजेश (Sreejesh ) अलग ही जोश में थे। जीत के बाद वह अपने किले यानी गोलपोस् पर चढ़कर बैठ गए।

भारतीय हॉकी टीम (Indian Hockey Team ) ने ओलिंपिक (Olympics) में अपने प्रदर्शन ने ना सिर्फ ब्रॉन् मेडल (Bronze medal) जीता है, बल्कि हर भारतीय का दिल भी जीत लिया है

तोक्यो ओलिंपिक ( Tokyo Olympics) में यह भारत का चौथा मेडल है। इससे पहले वेटलिफ्टिंग (Weightlifting ) में मीराबाई चानू ( Mirabai Chanu) ने सिल्वर (Silver medal), बैडमिंटन (Badminton) में पीवी सिंधू ( PV Sindhu )और मुक्केबाजी में लवलीना बोरगोहेन ( Lovlina Borgohain, Indian Boxer) ने ब्रॉन् मेडल ( Bronze medal) जीता है।

 

 

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