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Karni Mata Temple – करणी माता मंदिर

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अक्सर हमने भारत में बहुत से प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में सुना हैं। जो खुद ही में एक इतिहास को समेटे हुए हैं, जिसके कारण आज वह बेहद प्रसिद्ध भी हैं। और इनके रहस्यों को सुनने के बाद लोगो के मन में इन मंदिरों के दर्शन करने का मन होने लगता हैं। आज एक ऐसे ही रहसयमयी मंदिर के बारे में बात करेंगे , जिसके कई रहस्य और रोचक बातो के कारण वह मंदिर काफी प्रसिद्ध हैं और यहाँ बेहद संख्या में श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए आते हैं।

Karni Mata Temple

कहाँ है करणी माता का मंदिर

आज हम जिस मंदिर की बात कर रहे हैं, वह राजस्थान (Rajasthan) के देशनोक (Deshnok) में स्थित करणी माता (Karni Mata) का मंदिर है । इस मंदिर में सबसे रोचक बात यह हैं की यहां आपको बहुत से चूहे इधर–उधर घूमते हुए नजर आयेंगे। जिनको पवित्र माना जाता हैं। यह चूहे किसी भी चीज को नुकसान नहीं पहुंचाते और इतने चूहे होने के बावजूद भी यहां किसी भी प्रकार की गंध नही आती।

करणी माता मंदिर का इतिहास (History of Karni Mata)

माना जाता है की करणी माता ने एक साधारण लड़की के रूप में चारण (Chaaran) परिवार में जन्म लिया था। और उनके जन्म के बाद उनके परिवार ने उनका नाम रिधुबाई (Ridhubai) रखा था। जिसके पश्चात बड़े होने के बाद उनके परिवार ने उनका विवाह साठिया गांव के कीपोजी चारण से करवा दिया। लेकिन उनका अपना विवाहित जीवन से मन खत्म हो गया था ।

जिसके बाद उन्होंने अपने पारिवारिक जीवन से मुख मोड़ कर अपने, पति का विवाह अपनी बहन से करवा दिया और एक आध्यात्मिक रास्ते पे चल पड़ी और सन्यासी जीवन को ही अपने जिंदगी का उद्देश्य बना लिया था। और अपने जीवन को माता जगदम्बा के चरणों में समर्पित कर दिया था। जिसके बाद उनके द्वारा किए गए कई चमत्कारों से लोग उनको करणी माता के नाम से पुकारने लगे।

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कैसा है मंदिर का दृश्य (Scripture of Karni Mata Temple)

करणी माता मंदिर जो आज बेहद प्रसिद्ध और काफी दृश्य पूर्वक मंदिर हैं। जिसकी रचना बलुआ पत्थर द्वारा की गई। साथ ही साथ इस मंदिर के दीवारों पे काफी सुंदर नकाशी की हुई हैं। एक तस्वीर में तो मां देवी के हाथ में त्रिशूल पकड़े हुई देवी मां का अनोखा रूप दर्शाया गया है। जो वास्तविक में एक बेहद खूबसूरत दृश्य है मंदिर के दरवाजे जो चांदी से बने हुए है और वहा रखा चांदी का पात्र जिसमे चूहों को भोग लगाया जाता जो अपनी और लोगो को आकर्षित करता है।

मंदिर में चूहों का इतिहास

जैसे की हमने आपको बताया की मंदिर में लगभग 25000 से भी ज्यादा चूहे इधर–उधर घूमते हुए नजर आते है। जिन्हे मंदिर में काफी पवित्र स्थान दिया गया। अपको बता दे की इन चूहों के पीछे भी मंदिर में एक ऐसा रहस्य हैं, जिसे सुन आप हैरान हो जाएंगे। कहा जाता है की करनी माता का सौतेला पुत्र (उनकी बहन का पुत्र) लक्ष्मण एक बार कोलायत तहसील में स्थित कपिल सरोवर में पानी पी रहा था।

जिस दौरान उनके पैर फिसलने से उसी सरोवर में गिरने से उसकी मृत्यु हो गई। जिसके बाद करनी माता यमराज जी से याचना की और अपने पुत्र को वापिस मांगने की मुराद की। लेकिन ऐसा नहीं हो सका जिसके बाद उनके पुत्र को पुनर्जीवन के रूप में एक चूहे के रूप में जन्म लेना पड़ा। जिसके बाद अक्सर माना जाता है। की माता करणी के परिवार के लोगो पुनर्जीवन के रूप में मूषक के रूप में जन्म लेते हैं।

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चूहों की है काफी मानता

अक्सर चूहे अगर घर में पनाह ले लेते हैं तो हर कोई उनके द्वारा किए गए नुकसान से डरता है। लेकिन यहाँ पर रह रहे 25000 से भी ज्यादा चूहे, बिना कोई नुकसान पहुंचाए यह पर घूमते रहते है, और आपको सुन कर हैरानी होगी, की यह प्रसाद के रूप में आया भोग पहले इन चूहों के भोग से ही लोगो में बाटा जाता हैं, और सबसे चौकाने वाली बात तो यह है, चूहों से लगा भोग लोगो में बाटा जाता हैं और इससे कोई भी व्यक्ति बीमार नहीं होता और कहा जाता है, की जब इस मंदिर में सुबह और शाम की आरती होती है तो सारे चूहे अपने बिल से बाहर निकल कर आरती में आते हैं।

अपको एक और बात बता दे, की करणी माता मंदिर में इन चूहों को काफी मानता दी गई है, जिस पश्चात यह चूहे का हर तरह से ध्यान रखा गया है। और पक्षियों से बचाने के लिए पूरे मंदिर को जाल से ढका हुआ हैं। साथ ही साथ कहा जाता है, की आए श्रद्धालु यहाँ पर पैरो को घिसाकर चलते है, ऐसा इसलिए की उनके पैर के नीचे कोई चूहा आ कर मार ना जाए, अगर कोई चूहा किसी श्रदालु से मर जाता हैं। तो वहा पर उसे चांदी से बनी प्रतिमा चढ़ानी पड़ती हैं।

सफेद चूहे के दर्शन से होती है मनोकामना पूर्ण

इस मंदिर में घूम रहे चूहों में कई सफेद चूहे भी है। और मानता है की अगर कोई भी श्रद्धालु, अपनी मनोकामना को लेकर आया हैं और ऐसे में उसे सफेद चूहे के दर्शन हो जाते है। तो उस व्यक्ति के साथ कुछ अच्छा होगा और उसकी मनोकामना जरूर पूरी होगी।

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