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आधुनिकता के इस दौर में हम सभी एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में लगे हुए हैं। कैसे आगे निकला जाए, ऐसी बातें सोच-सोचकर हम खुद को ही बीमार बना रहे हैं। घर-परिवार, नौकरी या किसी भी मुद्दे पर जरूरत से ज्यादा सोचना सेहत के लिए नुकसानदेह है।

दौड़ भरी आज की जीवनशैली में सबसे बड़ी और उभरती हुई समस्या है मानसिक तनाव। हर किसी के जीवन में अपने पैर पसार चुका तनाव व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है। मानसिक रोग से बचना है तो किसी भी बात को सोचने के बजाय उसका हल तलाशें। अधिक सोचने से अच्छा है कि उसका हल निकाला जाए। कभी-कभी मन को शांत रखने से भी किसी समस्या का हल निकल जाता है। आज हम आपको एक सूंदर कहानी के माध्यम से इसे समझाने की कोशिश करेंगे।आइये देखते है इस कहानी को और समझने की कोशिश करते है।

एक गांव में एक आदमी रहता था,जो ताले तोड़ने के मामले में एक्सपर्ट था,यानी कि जहां कहीं भी ताले तोड़ने की बात आती थी या लॉक को खोलने की बात आती थी,तो उसका नाम सबसे पहले लिया जाता था। एक दिन कुछ समझदार लोगों ने उसकी परीक्षा लेनी चाही और उसको बता दिया गया कि आपको इस जगह पर इस तारीख को आना है और ताले को तोड़ना है ।

वह समय के अनुसार तय दिनांक को वहां पहुंच गया। उसे लोगों के द्वारा प्रतियोगिता के नियम समझा दिए गए। उसे समझाया गया कि आपको एक बॉक्स में बिठा दिया जाएगा और उस बॉक्स को पानी में उतार दिया जाएगा। आपको ताला खोल कर बाहर आना होगा इस बीच आपको लगता है कि लॉक आपसे नहीं खुल पाएगा तो,आप इमरजेंसी बटन को दबा सकते हैं और ऊपर आ सकते हैं, लेकिन आप प्रतियोगिता में हार जाएंगे,उसने सभी नियमों की हां कर दी और पानी में चला गया।

जैसे ही वह पानी में पहुंचा तो उसने जेब में से एक तार निकाला और लॉक को खोलने की कोशिश करने लगा। 4 से 5 बार कोशिश करने के बाद वह बार बार विफल हो रहा था । लेकिन उससे लॉक नहीं खुल रहा था अब ज्यादा समय तक पानी में रहना उसके लिए और भी मुश्किल था क्योंकि उसे सांस लेने में दिक्कत आ रही थी। अंततः उसने अपना पूरा दिमाग लगाया और एक बार अंतिम प्रयास किया। वह विफल हुआ और उसने इमरजेंसी बटन दबा दिया धीरे-धीरे ऊपर आने लगा ।

पानी के ऊपर आये बॉक्स को बाहर निकाला गया और हल्का सा धक्का देकर खोला गया,वह अचंभित हो गया । उसने सोचा कि मेरे दिमाग में यह ख्याल क्यों नहीं आया कि मैं इसको धक्का देकर खोलूँ । हो सकता है कि ये लॉक ही ना हो । उसे यह समझ आ गया था कि किसी भी काम को करते समय ज्यादा दिमाग का इस्तेमाल नही करना चाहिए। कुछ काम शांत रहकर भी किया जा सकता है । अत्यधिक दिमाग लगाने से वह काम विफल साबित हो सकता है।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अपने दिमाग का सही से इस्तेमाल करके किसी भी चीज को आसानी से सुलझाया जा सकता है। अत्यधिक दिमाग से परिणाम विपरीत आने की संभावना रहती है।

 

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