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Amar Katha

Amar Katha-अमरनाथ की अमर कथा

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Amar Katha– श्री अमरनाथ की पवित्र गुफा में सदाशिव भगवान-शंकर से भगवती-पार्वती को सुनाई गई यह महादेव की वह प्राचीन अमर कथा है जिसको कहने और सुनने वाले प्राणी अमर हो जाते थे , लेकिन भगवान शंकर ने स्वयं ही अमर कथा को श्राप दे दिया की इसको सुनने वाले प्राणी अब अमर नही होगे l यही वो असली अमर कथा है जो एक तोते ने सुन ली थी और वह अमर हो गया था l

Amar Katha

माता पार्वती महादेव को देख कर हमेश सोचती रहती थी , भगवान शंकर अमर क्यों और इनके गले में मुंडो की माला क्यों है

श्री अमरनाथ की गुफा का रहस्य

युगों पहले माता पार्वती के मन में शंका उठी की भगवान शंकर गले में मुंडमाला क्यों और कब धारण की , शंका दूर करने के लिए माता पार्वती ने भगवान शंकर से इस प्रश्न का उत्तर पूछा ,तब प्रभु शंकर ने बताया जितनी बार तुमने जन्म लिया है उतने मुंडो को धारण किया है तब माता पार्वती ने कहा प्रभु मेरा शरीर नाशवान है , मृत्युं को प्राप्त होता है परन्तु आप अमर है, इसका क्या कारण है l तब भगवान शंकर ने रहस्यमय मुस्कान भरकर कहा यह अमरकथा के कारण है l

तब माता पार्वती के मन में अमरता प्राप्त करने की इच्छा जागी और भगवान शंकर से हट करने लगी , कई वर्षो तक हट करने पर भगवान शंकर को कहानी सुनाने के लिए बाध्य कर दिया , परन्तु , समस्या यह थी की कोई अन्य जीव उस कथा को न सुने , क्योकि यह कथा जो कोई सुन लेगा वह अमर हो जायेगा इसलिए भगवान शंकर एक एकांत जगह की तलास करते हुए सर्वप्रथम पहलग्राम पहुचे जहाँ पर उन्होंने अपने नंदी(बैल) का पारित्याग किया, वास्तव में इस ग्राम का प्राचीन नाम बैल गाँव था , जो कालांतर में बिगड़कर तथा क्षेत्रीय भाषा के उच्चारण प्रभाव से पहलगाम बन गया l

तत्पश्चात चन्दनबाड़ी में भगवान शिव ने अपनी जटा को खोल कर चन्द्रमा को मुक्त किया, शेषनाग नामक झील में अपने सर्पो की माला को उतार दिया, आगे चलकर महागुनस पर्वत पर अपने पुत्र गणेश डबल.का त्याग करने का निश्चय किया, फिर पंचतरनी नमक स्थान पर पहुच कर शिव जी ने अमरनाथ की गुफा में प्रवेश से पहले पांच तत्व (पृथ्वी, जल , वायु, अग्नि , और आकाश ) को परित्याग किया l भगवान शिव इन्ही पांच तत्वों के स्वामी माने जाते है l

इसके पश्चात माता पार्वती और भगवान शिव ने इस पर्वत श्रखला पर ताण्डव नृत्य किया था, ताण्डव नृत्य का मतलब है सृष्टी का त्याग करना | इसके पश्चात भगवान शिव सब कुछ छोड़ कर अमरनाथ की इस गुफा में पार्वती सहित प्रवेश किया और मृगछाला के ऊपर बैठ कर ध्यान मग्न हो गये |

कथा सुनाने से पहले भगवान शिव ने कालाग्नि नामक रूद्र को प्रकट किया , उसको आदेश दिया की चारो तरफ ऐसी आग लगा दो की सारे जिव जंतु जलकर भस्म हो जाये | रूद्र ने एसा ही किया और चारो तरफ आग लगा दी ,परन्तु उनकी मृगछाला के नीचे एक तोते का अंडा रह गया और उसने अंडे से बहार आकार अमर कथा को सुना लिया l

Amar Katha

अमर कथा की महिमा (Amar Katha)

अमरकथा की मान्यता है की इसको सुनने से वह व्यक्ति अमर हो जाता था जो यह कथा को ध्यान पूर्वक सुनता है इस अमर कहानी को सुन कर भगवान शिव के परम धाम की प्राप्ति होती है, यह कथा इतनी पवित्र थी जिसको किसी इंसान जीव जंतु कीड़े आदि प्राणधारी जीव को सुना नही सकते थे क्योकि सुनते ही वह अमर हो जाता, इस अमरनाथ की गुफा में भगवान की शिव लिंग की पूजा होती है इस कहानी को सुन कर प्रभु शिव अपने परम धाम में स्थान प्रदान करते है ,

श्री अमरनाथ की अमरकथा

इस कथा का नाम अमर कथा इसलिए है की इसके श्रवण करने से शिवधाम की प्राप्ति होती है, यह वह पवित्र कथा है जिसके सुनने से सुनने वाला अमर हो जाता है, जब भगवान श्री शंकर जी यह कथा भगवती पार्वती को सुना रहे थे तो वहां एक तोते का बच्चा भी इस परम कथा को सुन रहा था और इसे सुनकर इस तोते ने श्री शुकदेव का रूप लिया l इस कथा को सुनकर शुकदेव जी अमर हो गये थे बाद में शुकदेव जी महान ऋषि बने थे l

यह संवाद भगवती और भगवान शंकर जी के है यह परम पवित्र कथा लोक व परलोक का सुख देने वाली है भगवान शंकर और माता पार्वती का संवाद का वर्णन भृगु-सहिता, नीलमत-पुराण ,तीर्थ संग्रह आदि ग्रंथो में पाया जाता है हम सभी कहानी को अपने माता पिता के जरिये जानते है , आगे हम इन्ही अमर कहानियों के बारे में जानेगे l

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100+ Motivational Quotes in Hindi 2023

100+ Motivational Quotes in Hindi 2023

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100+ Motivational Quotes in Hindi 2023

पढ़ा करो कभी मेरे मौन को तुम,
क्या पता तुम्हे रब मिल जाये !

Pada Karo Kabhi Mere Maun Ko Tum,
Kya Pta Tumhe Rab Mil Jaye…!

100+ Motivational Quotes in Hindi 2023

100+ Motivational Quotes in Hindi 2023

तुम्हारा जीवन, तुम्हारी य़ात्रा,
तुम्हारी मंजिल,तुम्हारे हाथ में हैं,
अब देखना यह हैं
कि अंधकार मिलने पर
तुम रुक जाते हो,
य़ा फिर प्रकाश की खोज में
निकल जाते हो !

Tumhara Jivan, Tumhari Yatra,
Tumhari Manjil, Tumhare Hath Me Hai,
Ab Dekhna Yah Hai
Ki Andhkar Milne Par
Tum Ruk Jate Ho,
Ya Fir Prakash Ki Khoj Me
Nikal Jate Ho…!

100+ Motivational Quotes in Hindi 2023

100+ Motivational Quotes in Hindi 2023

अपने स्वाभाव को बदलो,
खुद को भीतर से सुंदर बनाओ,
और तब तक ऐसा करो,
जब तक तुम्हारे आस – पास के लोगो को
यह एहसास नही होता
कि तुम्हारे साथ जीवन य़ात्रा करना
सौभाग्य हैं !

Apne Swabhav Ko Badlo,
Khud Ko Bhitar Se Sundar Banao,
Aur Tab Tak Aisa Karo,
Jab Tak Tumhare Aas Pas Ke Logo Ko
Yah Mahsus Nahi Hota
Ki Tumhare Sath Jivan Yatra Karna
Saubhagya Hai…!

100+ Motivational Quotes in Hindi 2023

100+ Motivational Quotes in Hindi 2023

मेरे साथ केवल वही लोग चल सकते हैं,
ज़िनके भीतर विद्रोह हो, क्रांती हो,
मिट जाने का भय ना हो,
जो स्वार्थी ना हो !

Mere Sath Kewal Wahi Log Chal Sakte Hai,
Jinke Bhitar Vodroh Ho, Kranti Ho,
Mit Jane Ka Bhay Na Ho,
Jo Swarthi Na Ho…!

100+ Motivational Quotes in Hindi 2023

100+ Motivational Quotes in Hindi 2023

भीतर चलने वाली सांसे भी मेरी नही हैं,
फिर मैं यह कैसे मान लू कि जो कुछ हो रहा हैं,
वो मैं कर रहा हू !

Bhitar Chalne Wahi Sanse Bhi Meri Nahi Hai,
Fir Bhi Yah Maan Lu Ki Jo Kuch Ho Rha Hai,
Vo Main Kar Rha hu…!

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100+ Best Motivational Quotes In Hindi

100+ Best Motivational Quotes In Hindi

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100+ Best Motivational Quotes In Hindi

यह सत्य हैं
कि मैं जो भी हू,
ईश्वर का ही अंश हू,
और बिना प्रेम के,
मैं शुन्य हू !

Yah Sayta Hai
Ki Main Jo Bhi Hu,
Ishwar Ka Hi Ansh Hu,
Aur Bina Prem Ke,
Main Shunya Hu…!

100+ Best Motivational Quotes In Hindi

100+ Best Motivational Quotes In Hindi

जब प्रेम गहरा होता हैं ना,
तो मौन हो जाता हैं,
फिर वो बस रूह को
समझ आता हैं !

Jab Prem Gahra Hota Hai Na,
To Maun Ho Jata Hai,
Fir Vo Bas Ruh Ko
Samjh Aata Hai….!

100+ Best Motivational Quotes In Hindi

100+ Best Motivational Quotes In Hindi

कर्म ऐसे कीजिये कि संसार
आपको हृदय में जगह दे,
और ईश्वर बना ले,
दुखी ना हो !

Karm Aise Kijiye Ki aansar
Apko Hraday Me Jagah De,
Aur Ishwar Bna Le,
Dukhi Na Ho…!

100+ Best Motivational Quotes In Hindi

100+ Best Motivational Quotes In Hindi

खुद की तुलना दुसरो से करके,
खुद को कष्ट मत दो,
तुम जैसे भी हो,अच्छे हो,
स्वयं को स्वीकार करो,
और अपनी जीवन य़ात्रा का आनंद लो !

Khud Ki Tulna Dusro Se Karke,
Khud Ko Kasht Mat Do,
Tum Jaise Bhi Ho, achhe Ho,
Swyam Ko Swikar Karo,
Aur Apni Jivan Yatra Ka Aanad Lo…!

100+ Best Motivational Quotes In Hindi

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अज्ञानी को भी ईश्वर मिल सकता हैं,
यदि उसके भीतर प्रेम हैं,
क्योकि ईश्वर हृदय देखता हैं,
ज्ञान नही !

Agyani Ko Bhi Ishwar Mil Sakta Hai,
Yadi Uske Bhitar Prem Hai,
Kyonki Ishwar Hraday Dekhta Hai,
gyan Nahi…!

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Brahmacharya

(Brahmacharya) ब्रह्मचर्य – आत्म-संयम और आध्यात्मिक विकास के रहस्यों का द्वार

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Brahmacharya– मानव शरीर पांच तत्व आकाश,जल,वायु,अग्नि और मिटटी से मिल कर बना है इसी प्रकार मानव शरीर में पांच ज्ञानेद्रिया नाक,कान,आँख,जीव और त्वचा है, इन इन्द्रियों को बस में रखना बहुत जरुरी है लेकिन आज के समय में मानव शरीर पर इन इन्द्रियों का दुषप्रभाव है, जिसकी बजह से व्यक्ति बहुत परेशान,चिंतित और मानसिक रोग से ग्रस्त है, हमारे सनातन धर्म में पांच इन्द्रियों पर काबू करने के लिए ब्रह्मचर्य का पालन करना बताया गया है l

BRAHMACHARYA

Brahmacharya- ब्रह्मचर्य क्या है ?

ब्रह्मचर्य का अर्थ है अपनी इन्द्रियों को बस में रखना, ब्रह्मचर्य संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है “ब्रह्मा के चरणों में चलना” या “ब्रह्म की यात्रा करना”. यह एक पुरानी भारतीय आध्यात्मिक पद्धति है जिसका मुख्य उद्देश्य है इंद्रियों को नियंत्रित करके ब्रह्मा या आत्मा की अनुभवयात्रा करना। यह एक व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास, धार्मिकता और आध्यात्मिक प्रगति को बढ़ावा देने का एक मार्ग है।

लोगो को बताया ही नहीं जाता की ब्रह्मचर्य क्या है ? और इससे मानव जीवन का कितना और किस प्रकार विकास हो सकता है l केवल इसी अज्ञानता के कारण बड़े बड़े शिक्षित नवयुवक आज अशिक्षा के अंधकार में पड़े हुए है l कमोतोजक और विलासी वस्तुओ के दास बनकर वे अपने शारीरिक शक्तियों का अपव्यय कर रहे है l उन्हें मालूम नहीं की शरीर की भिंती को स्थायी रखने वाली नीव को हम अपने ही हाथो से गिरा रहे है !

ब्रह्मचर्य को आध्यात्मिक साधना के रूप में भी देखा जाता है, जिसमें एक व्यक्ति अपनी इच्छा और भावनाओं को नियंत्रित करके सत्य, शुद्धता और सामर्थ्य की अवस्था को प्राप्त करने का प्रयास करता है।

ब्रह्मचर्य के नियम – (Brahmacharya)

Brahmacharya के मार्ग का चयन: ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करने से पहले, व्यक्ति को अपने जीवन में ब्रह्मचर्य को समझने की आवश्यकता होती है, और इसे अपने अनुसार स्वीकार करना चाहिए। यह एक योग्य और सुसंगत मार्ग का चयन करना शामिल होता है, जो उसके धार्मिक और आध्यात्मिक उन्नति के लिए सहायक होता है।
शारीरिक ब्रह्मचर्य: शारीरिक ब्रह्मचर्य में व्यक्ति को अपने इंद्रियों को नियंत्रित करने का प्रयास करना होता है। इसका अर्थ है, व्यक्ति को विवेकपूर्वक और सावधानीपूर्वक अपनी इंद्रियों का उपयोग करना जिससे कि वह अपने इंद्रियों के वशीभूत होकर विषयों की ओर न जाए l

ब्रह्मचर्य के महत्वपूर्ण गुण

Brahmacharya में व्यक्ति अपने शारीरक गतिविधियों पर नियंत्रण रखता है अपने कार्य के लिए दुसरो पर निर्भर नही रहता है, अपने मन को वश में रखना सीखना होता है, ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले व्यक्ति का जीवन पूर्ण रूप से शुद्ध होता है, मानव को अपने जीवन में विवाह से पहले ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य बताया गया है , Brahmacharya में मानव को अपनी गतिविधियों के साथ साथ खान पान को भी पुर्णतः शुद्ध रखना जरुरी है, पुराने ज़माने से चली आ रही कहावत इसका बहुत बड़ा उदाहरण है

ब्रह्मचर्य के लाभ: ब्रह्मचर्य का पालन करने से मन, शरीर, और आत्मा को आनंद, शांति, और सुख मिलता है। इसके अलावा यह आत्मसम्मान, संतुष्टि, उच्चता की भावना, और सम्पूर्णता के अनुभव को प्रदान करता है।

जैसा खाओगे अन्न वैसा होगा मन

ब्रह्मचर्य की आवश्यकता

Brahmacharya की आवश्यकता धार्मिक, आध्यात्मिक, सामाजिक और शारीरिक स्तर पर हो सकती है। यह एक व्यक्ति के विकास और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण आदर्श है। निम्नलिखित कुछ कारण हैं जिनके कारण ब्रह्मचर्य की आवश्यकता हो सकती है,

आध्यात्मिक विकास: ब्रह्मचर्य आध्यात्मिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह मन को संतुलित रखकर और अवास्तविक आकर्षणों से दूर रहकर आध्यात्मिक अनुभव को संभव बनाता है। यह विचारशीलता, शांति, ध्यान, और धार्मिक उन्नति के लिए महत्वपूर्ण है

सामाजिक संतुलन: ब्रह्मचर्य सामाजिक संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। यह व्यक्ति को संबंधों, संगठनों और समाज के साथ एक साथी और समरस्थ बनाने में मदद करता है।

व्यक्तिगत स्वास्थ्य: ब्रह्मचर्य शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह विकार्य लैंगिक संबंधों से बचने और जननांगों के स्वस्थ्य रखने में मदद करता है। यह यौन संचारित रोगों और अनचाहे गर्भावस्था के जोखिम को कम कर सकता है।

Screenshot 4
ब्रह्मचर्य के लाभ

आज के समय में मानव का Brahmacharya बिगड़ गया है, एक मन भोजन से एक बार का वीर्य बनता है , मानव अपनी मन की शांति के लिए दिन में कई कई वार वीर्य नास कर देता है, जिसके कारण शारीर में कमजोरी, मन अशांत रहता है, कार्य में दृढ़ता समाप्त हो जाती है मानव के जीवन में गलत आचरण और गलत क्रिया करने की बजह से मानव तन मन दोनों से कमजोर होता जा रहा है l

वीर्य नास को मानव एक क्रिया समझ कर उसे बहाता रहता है, मानव समझता है इससे हमारे शारीर पर कोई प्रभाव नही पड़ेगा लेकिन उसके उलट बहुत दुष्प्रभाव पड़ते है , अगर ब्रह्मचर्य (Brahmacharya) का पालन करके वीर्य को बचाया जाये तो एक शक्तिशाली मन और शरीर का विकस किया जा सकता है ,कार्य करने में भी आनंद आयेगा , और आप अपने लक्ष्य को पाने के लिए अपने मन को मजबूत बना पाओगे l

वीर्य रक्षा के नियम –

मानव जीवन का मूल उद्देश्य संसार पर विजय प्राप्त करना है और यह तभी संभव हो सकता है जब इन्द्रियों को अपने वश में किया जाय, इन्द्रियां खाली समय में पाप मार्ग की और दौड़ती है , उसी समय उन्हें उस मोहमयी दुनिया कीओर भागने का अवसर मिलता है l इसलिए मनुष्य का कर्तव्य है की वह उन इन्द्रियों को , जिनसे पाप की श्रृष्टि होती है , सदैव अच्छे कामो में लगाये रहे l उन्हें बुरे कार्यों की ओर जाने का समय न दे l इससे ब्रह्मचर्य साधन में सहायता मिलेगी l शरीर की शक्तियों का विकास होगा और हृदय में आत्मिक ज्ञान का प्रकाश उत्पन्न होगा l

प्रतेक ब्रह्मचारी को परिश्रमपूर्ण कार्यो में लगा रहना चाहिए l अच्छी और सुरुचिपूर्ण पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए , ईश्वर की प्रार्थना तथा महापुरुषों के जीवन चरित्र का पाठ करना चाहिए | सद्वृत्तियों का सहारा लेना चाहिए , यही ब्रह्मचर्य के मूल साधन है l प्रतेक ब्रह्मचारी को इन्ही का सहारा लेना चाहिए l इन नियमो का पालन कर कोई भी मनुष्य अपनी वीर्य शक्ति को शुरक्षित रख सकता है l

ब्रह्मचर्य पर विद्वानों की सम्मतियाँ

स्वामी नित्यानंद – वीर्य से आत्मा को अमरत्व प्राप्त होता है , अतः प्रतेक स्त्री पुरुष को ब्रह्मचर्य व्रत पालन करना चाहिए |
स्वामी विवेकानंद – वीर्य ही साधुता है और दुर्बलता पाप भी , अतः बलवान और वीर्यवान बनने की चेष्टा करनी चहिये l
महात्मा ईसा – ईश्वर के राज्य में सर्वप्रिय बनने के लिए अविवाहित जीवन बिताना अत्यंत धर्म है l दुसरे शब्दों में ब्रह्मचर्य जीवन ही स्वर्गिक आदेश है l

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501 Best Motivational Thought 2023

501 Best Motivational Thought 2023

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501 Best Motivational Thought 2023

जिस दिन तुम भीतर की आवाज सुनोंगे,
सारा संसार तुम्हे आगे बढ़ने से रोकेगा,
लेकिन तब रुकना असंभव होगा,
क्योकि तब, तुम कौन हो,
यह जान चुके होगे !

Jis Din Tum Bhitar Ki Awaj Sunege,
Sara Sansar Tumhe Aage Badhane se Rokega,
Lekin Tab Rukna Asambhav Hoga,
Kyonki Tab, Tum Kaun Ho,
Yah Jaan chuke Hoge…!

501 Best Motivational Thought 2023

501 Best Motivational Thought 2023

किसी को दुख देकर जो ख़ुशी मिले,
वो ख़ुशी जिस व्यक्ति को स्वीकार नही,
वो ही मनुष्य कहलाने योग्य हैं !

Kisi Ko Dukh Dekar Jo Kushi Mile,
Vo Kushi Jis Vyakti Ko Swikar Nahi,
Vo Hi Manushya Kahlane Yogya Hai…!

501 Best Motivational Thought 2023

501 Best Motivational Thought 2023

जिसे तुम ईश्वर मान सको,
ईश्वर के भाती हृदय में रख सको,
वही प्रेम करने योग्य हैं,
बाकी सब भ्रम हैं,
जो आज नही तो कल
टूट जाना हैं !

Jise Tum Ishwar Maan Sako,
Ishwar Ke Bhati Hraday Me Rakh Sako,
Wahi Prem Karne Yogya Hai,
Baki Sab Bhram Hai,
Jo Aaj Nahi To Kal
Toot Jana Hai….!

501 Best Motivational Thought 2023

501 Best Motivational Thought 2023

जिस दिन तुम गिरकर
उठना सीख लोगे,
समझ लो जीना सीख लोगे !

Jis Din Tum Girkar
Uthna Seekh Loge,
Samjh Lo Jeena Seekh Loge…!

501 Best Motivational Thought 2023

501 Best Motivational Thought 2023

यह सत्य हैं कि तुम वही बन जाते हो,
जो तुम बार – बार सोचते हो,
इसमे ईश्वर की य़ा संसार की
कोई भूमिका नही !

Yah Satya Hai Ki Tum Wahi Ban Jate Ho,
Jo Tum Bar Bar Sochte Ho,
Isame Ishwar Ki Ya Sansar Ki
Koi Bhumika Nahi…!

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51 Best Motivation Lines 2023

51 Best Motivation Lines 2023

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51 Best Motivation Lines 2023

51 Best Motivation Lines 2023


कर लो बात ज़ितनी करनी हैं,
कौन जाने यह सांस कब रुक जानी हैं,
दिल की बात दिल में रह जानी हैं,
मुलाक़ात अधूरी रह जानी हैं,
कर लो बात ज़ितनी करनी हैं,
कौन जाने यह सांस कब रुक जानी हैं!!

Kar Lo Baat Jitni Karni Hai,
Kaun Jaane yah Sans Kab Ruk Jani Hai,
Dil ki Baat Dil Me Rah Jani Hai,
Mulakaat Adhoori Rah Jani Hai,
Kar Lo Baat Jitni Karni Hai,
Kaun Jaane Yah Sans Kab Ruk Jani Hai…!!

51 Best Motivation Lines 2023

51 Best Motivation Lines 2023

कुछ लोग कहते हैं,
कि मैं बदल गया हू,
अब उन्हें कैसे समझाऊं,
कि मैं श्री कृष्णा का
हो गया हू !

Kuch Log Kahte Hai,
Ki Main Badal Gya Hu,
Ab Unhe Kaise Samjhaun,
Ki Main Shri Krishna Ka
Ho Gya Hu…!

51 Best Motivation Lines 2023

51 Best Motivation Lines 2023

स्वार्थ से भरा मनुष्य अंतिम सांस तक
खोकला हो जाता हैं,
और जाते – जाते भी मनुष्य जाती को
कलंकित करके जाता हैं,
जिसे ईश्वर भी कभी स्वीकार नही करता,
और ना ही वो जन्म – मरण के बंधन से
कभी मुक्त हो पाता हैं !

Swarth Se Bhra Manushya Antim Sans Tak
Khokla Ho Jata Hai,
Aur Jate – Jate Bhi Manushya Jati Ko
Alnkit Karke Jata Hai,
Jise Ishwar Bhi Kabhi Swikar Nahi Karta,
Aur Na Hi Vo Janm – Maran Ke Bandhan Se
Kabhi Mukt Ho Pata Hai…!

51 Best Motivation Lines 2023

51 Best Motivation Lines 2023

तुम कितने भी बुरे क्यो ना हो,
तुम्हारे भीतर एक अच्छा इंसान हैं,
जिसे तुमने भीतर सुला रखा हैं,
बस उसी को जगाना मेरा लक्ष्य हैं !

Tum Kitne Bhi Bure Kyun Na Ho,
Tumhare Bhitar Ek Achha Insan Hai,
Jise Tumne Bhitar Sula Rakha Hai,
Bas Usi Ko Jagana Mera Lakshya Hai…!

51 Best Motivation Lines 2023

51 Best Motivation Lines 2023

जब भी तुम्हे भय लगे,
तुम स्वयं को जानने का प्रयत्न करो,
भीतर के प्रकाश को मेहसूस करो,
मुझे विश्वास हैं कि तुम अनंत में मिल जाओंगे,
और मृत्यु पर भी विजय पाओगे !

Jab Bhi Tumhe Bhay Lage,
Tum Swyam Ko Janane Ka Paryatan Karo,
Bhitar Ke Prakash Ko Mehashoosh Karo,
Mujhe Vishwas Hai Ki Tum Anant Me Mil Jaoge,
Aur Mrityun Par Bhi Vijay Paoge…!

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KARNA

Karna (कर्ण) : The Tragic Hero of Mahabharata and His Inspiring Journey

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सूर्य पुत्र कर्ण

जब कभी दान पुण्य की बात आती है तो कुंती – सूर्य पुत्र कर्ण का नाम सबसे ऊपर आता है , महाभारत में अर्जुन और युधिष्टर जैसे कई महान चरित्रों का वर्णन मिलता है, लेकिन जहाँ दान की बात आती है तो श्री कृष्ण भी सूर्य पुत्र कर्ण की प्रसंशा ही करते है , श्री कृष्ण कर्ण की प्रशंसा करते हुए कहते की सदी का सबसे महान दानवीर योद्धा कर्ण है l

Karna

कौन थे कर्ण – Who is Karna

Karna के अनेक नाम है जैसे सूर्य पुत्र कर्ण , सूत पुत्र कर्ण ,राधेय ,वसुसेन,दानवीर कर्ण,अंगराज कर्ण,विजय धारी , सबसे प्रसिद्ध नाम दान वीर कर्ण हुआ है , कर्ण का जीवन बहुत ही संघर्ष पूर्ण था, कर्ण का जन्म कुंती के विवाह से पहले हो गया था, क्योकि कुंती की तपस्या से प्रभावित हो कर ऋषि ने उनको एक मंत्र दिया ,जिस देवता का नाम लेकर इस मंत्र उच्चारण करेगी , वह देवता प्रकट हो कर उनको एक पुत्र प्रदान करेगे,

कुंती ने सूर्य देव का नाम लेकर इस मंत्र का प्रयोग किया जिसके फलस्वरूप कर्ण का जन्म हुआ, लेकिन कुंती अविवाहित थी इसलिए वह कर्ण को नदी में छोड़ देती है, जिसके पश्चात राधा और अधिरथ कर्ण का पालन करते है, कर्ण वचपन से ही कान में कुण्डल और शरीर पर कबच पहने हुए ही पैदा हुए थे l


सूर्य पुत्र कर्ण के कुण्डल और कबच में इतनी शक्ति थी , की जव तक कर्ण के पास ये दोनों चीजे थी तब तक कोई कर्ण को मार नही सकता था, कुंती ने कर्ण को देखा और अन्दर ही अन्दर डर रही थी, शादी से पहले पुत्र प्राप्ति उस समय पाप माना जाता था उसी डर से कुंती ने कर्ण को एक टोकरी में रख कर पानी में वहा दिया और कर्ण बहते हुए सारथी अधिरथ और उनकी पत्नी राधा को मिले जो पितामा भीष्म के सार्थी थे l

कर्ण की शिक्षा – Karna Training

सूर्य पुत्र कर्ण को शुरु से धनुष चलाने में अधिक रूचि थी, घुड़सवारी में उन्हें आनंद नही आता था इसलिए उनके पिता गुरु द्रोणाचार्य के पास गये और कर्ण के गुरु बनने की प्रार्थना की लेकिन द्रोणाचार्य ने माना कर दिया क्योकि उस समय वह हस्तिनापुर के गुरु थे और वे सिर्फ छत्रियों को ही शिक्षा दे सकते थे, कर्ण शुद्र थे ,अपनी शिक्षा के लिए बहुत परेशान हुए थे क्योंकी कर्ण कर्म से तो छत्रिय थे लेकिन समाज के हिसाब से सूद्र थे, जिसकी बजह से समाज ने उन्हें स्वीकार नही किया l

उसके पश्चात वे भगवन परशुराम के पास गये ,भगवन परशुराम ने कर्ण को शिक्षा दी और कर्ण सबसे बड़े धनुर्धर बने, और अपनी पूरी शिक्षा भगवान परशुराम से प्राप्त की और परशुराम के प्रिय शिष्य बने l

शिक्षा के दौरान कर्ण को मिले श्राप

युद्ध विद्या काम नही आयेगी– कर्ण ने अपनी शिक्षा भगवान परशुराम से प्राप्त की , लेकिन भगवान परशुराम झूट बोलने से नफरत करते थे, एक बार जब भगवान परशुराम नीद पूरी कर रहे थे तो कर्ण ने भगवान परशुराम का सिर अपनी गोद में रखा हुआ था,

और तभी एक भयानक कीड़ा कर्ण की जांग पर काट रहा था कर्ण इस पीड़ा को आराम से शह रहे थे भगवान परशुराम की नीद खुली तो उन्होंने कर्ण को कष्ट सहन करता देख उनको विश्वास हो गया की कर्ण सूद्र नही है बल्कि एक छत्रिय है और उन्होंने कर्ण को श्राप दिया की कर्ण जब तुमको मेरी विद्या की सबसे अधिक आवश्यकता होगी उस समय मेरी विद्या कभी काम नही आयेगी l

रथ का पहिंयाँ जमीन में धस जायेगा – एक दिन कर्ण धनुष ले कर जंगल में शिकार करने निकले और शिकार करते समय कर्ण ने गलती से गाय के बच्चे को मार दिया, वह गाय का बच्चा एक ऋषि का था ऋषि को पता चला तो ऋषि ने कर्ण को श्राप दिया , की जब तुम अपने सबसे महत्वपूर्ण युद्ध में होगे तो तुम्हारे रथ का पहिया जमीन में धस जायेगा l

Karna

कर्ण का विवाह

कर्ण जब युवा अवस्था में तब उनका मन एक राजकुमारी पर आ गया, लेकिन राजकुमारी ने कर्ण को सूतपुत्र मानकर अपने पिता द्वारा आयोजित स्वयंवर में दूसरे व्यक्ति का चयन कर लिया जिसे देख कर कर्ण को बहुत ही क्रोधित हो गए और उन्होंने उसी समाहरोह में स्थित उनकी सहेली से शादी रचाई और अपने राज्य अंगप्रदेश में वापस आ गए और आराम से जीवन यापन करने लगे l

कर्ण की मित्रता

सूर्य पुत्र कर्ण एक आदर्शवादी व्यक्ति थे जब सारे लोगो ने कर्ण का अपमान किया तब दुर्योधन धन ने कर्ण को अपना मित्र बनाया और राज्य का एक छोटा हिस्सा जिसका नाम अंगप्रदेश था वहां का राजा बनाया और अपनी सभा में उचा दर्जा दिया, कर्ण ने इस ऋण को सबसे ऊपर रखा ,कर्ण ने और अपने मित्र के लिए अधर्म का भी साथ दिया जिसका उनको फल भोगना पड़ा ,और महाभारत के युद्ध में वीरगति को प्राप्त किया .,

कर्ण के जीवन के कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

सूर्य पुत्र कर्ण का जीवन कष्टों में बीता, लेकिन कर्ण अर्जुन के बाद सबसे बड़े योधा थे, कर्ण अधर्म के साथ थे जिसकी बजह से अपने प्राण देने पड़े , कर्ण सूर्य देव के पुत्र थे , कुंती उनकी माँ थी , वैसे तो पाण्डव पाच भाई थे लेकिन कुंती के पहले पुत्र कर्ण थे पाण्डव पांच नहीं छः भाई थे जिसमे कर्ण सबसे बड़े थे , लेकिन दुःख की बात तो यह थी की कर्ण की मृत्यु के पश्चात उनके भाइयो को पता चला की कर्ण उनके बड़े भाई है l

महाभारत में कर्ण का योगदान

सूर्य पुत्र कर्ण का महाभारत के युद्ध महत्वपूर्ण योगदान था, कर्ण अकेले ही महाभारत के युद्ध को समाप्त कर सकते थे, क्योंकि कर्ण अर्जुन से भी अधिक महान योद्धा थे , महाभारत के युद्ध में कर्ण के तीर अर्जुन के रथ को पीछे हटा देते थे जबकि अर्जुन के रथ पर त्रिलोकी नाथ, भगवान हनुमान विराजमान थे , कर्ण को अगर भगवान परशुराम ने यदि कर्ण को श्राप नही दिया होता तो महाभारत का परिणाम कुछ और ही होता और अर्जुन की जगह कर्ण महाभारत के विजेता होते l

कर्ण की मृत्युKarna Death

कौरव और पाण्डव के बीच अब तक का सबसे बड़ा युद्ध हुआ जिसको महाभारत के नाम दिया, जिसके रचियता वेद व्यास जी थे इसमें कर्ण की मृत्यु के बारे में बताया गया है कर्ण ने अधर्म का साथ दिया था कर्ण को पता था वो अधर्म का साथ दे रहे है फिर भी वे अधर्म की तरफ से लडे थे और उनके गुरु भगवांन परशुराम का श्राप महत्वपूर्ण कारण था, महाभारत के युद्ध में कर्ण और अर्जुन के बीच हुए युद्ध में अर्जुन ने कर्ण का शीश अपने तीर से काट दिया था और इस तरह महान युग के महान योद्धा का अंत हुआ l

कहानी का सार

कर्ण के जीवन से हमें यह सीख मिलती है की हमें हमेश दान वीर और दयालु होना चाहिये l उसका उदार मन और दानशीलता हमें यह सिखाता है कि हमें संघर्ष करने वालों की मदद करनी चाहिए और अपना धन और समय दान करके दूसरों की मदद करनी चाहिए ।

कर्ण की कथा से हमें सामर्थ्य की महत्वपूर्णता समझ में आती है। वह कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद अपनी प्रतिभा और सामर्थ्य के बल पर आगे बढ़ते हैं। जीवन में विपरीत परिस्थितियों का सामना करना और संघर्ष करना महत्वपूर्ण है।

कर्ण न्यायप्रिय और धर्मनिष्ठ क्षत्रिय योद्धा थे , उन्होंने कभी न्याय से पक्षपात नहीं किया और अपने मित्रो के पक्ष में स्थिर होकर खड़े रहना हमें यह ज्ञात कराता है कि न्यायप्रियता, धर्म के पालन और सत्य का पालन करना हमारी मूल्यवान संपत्ति होनी चाहिए।

कर्ण को दानशीलता का सबसे महान उदहारण माना जाता है , क्योंकि वह दानधर्म के हमेश तत्पर रहते थे और अन्य जनों की सेवा के लिए अपनी संपत्ति का उपयोग करते थे, हमें यह सिखाता है कि समाजसेवा और अन्यों की मदद करना हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए।

कर्ण की कथा हमें परिवार के महत्व को समझाती है। वे अपने माता-पिता, गुरु और भाई-बहन के प्रति आदर और सम्मान का पालन करते थे। हमें यह याद दिलाता है कि हमें अपने परिवार के सदस्यों के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान का ध्यान रखना चाहिए l

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101 LIFE CHANGING QUOTES IN HINDI

101 LIFE CHANGING QUOTES IN HINDI

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101 LIFE CHANGING QUOTES IN HINDI

ईश्वर एक संकेत हैं कि आप अकेले नही हो,
इसलिये डरो मत जो कुछ गलत लगे,
उसे सही करने की सोचो,
ईश्वर तुम्हारा हर अच्छे कार्य में,
मार्गदर्शन करेगा,
और हर असंभव कार्य को संभव करेगा !

Ishwar Ek Sanket Hai Ki Aap Akele Nahi Ho,
ISsliye Daro Mat Jo Kuch Galat Lage,
Use Sahi Karne Ki Socho,
Ishwar Tumhara Har Achhe Karya Me,
Margdarshan Karega,
Aur Har Asambhav Karya Ko Sambhav Karega…!

101 LIFE CHANGING QUOTES IN HINDI

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वास्तव में वही व्यक्ति
अकेला होता हैं,
जो खुद से अंजान हो !

Vastav Me Wahi Vyakti
Akela Hota Hai,
Jo Khud Se Anjan Ho….!

101 LIFE CHANGING QUOTES IN HINDI

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कभी लिखता हू ,
कभी पढ़ता हू,
कभी सफर को हमसफर कहता हू,
कभी मलंग इतना रहता हू,
कि खुद को सिकंदर कहता हू !

Kabhi Likhta Hu,
Kabhi Padta Hu,
Kabhi Safar Ko Humsafar Kahta Hu,
Kabhi Malang Itna Rahta Hu,
Ki Khud Ko Sikandar Kahta Hu…..!

101 LIFE CHANGING QUOTES IN HINDI

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जो हर परिस्थिति से लड़ने के लिए राजी हैं,
उसके जीवन में सारे कष्ट समाप्त हो जाते हैं!

Jo Har Paristithi Se Ladne Ke Liye Raji Hai,
Uske Jivan Me Sare Kasht Smapt Ho Jate Hai….!

101 LIFE CHANGING QUOTES IN HINDI

101 LIFE CHANGING QUOTES IN HINDI

जब लोग तुम्हारे भीतर की शांति
अौर आत्मविश्वास
को डिगाने में असफल हो जाये,
तो समझ लो
तुम सफलता की ओर बढ़ चुके हो !

Jab Log Tumhare Bhitar Ki Shanti
Aur Aatmvishwas
Ko Digane Me Asafal Ho Jaye,
To Samjh Lo
Tum Saflta Ki Aur Badh Chuke Ho…..!

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Mahatma Gandhi

Mahatma Gandhi – महात्मा गाँधी जी का जीवन परिचय

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Mahatma Gandhi – हमारा भारत शुरू से किसी न किसी का गुलाम रहा है पहले राजा महाराजा का शासन रहता था फिर मुगलों ने अनेक वर्षो तक शासन किया, इनके बाद अंग्रेज आये भारत व्यापर करने और कूट नीति से भारत पर अपना शासन करना शुरु कर दिया, जब भारत गुलाम था तब भारत में सत्य अहिंसा के मार्ग पर चल रहा एक आदर्श व्यक्ति जिसका भारत देश की आज़ादी में बहुत बड़ा हाथ है, जिनको भारत में बापू के नाम से जानते है जिनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी है जिनको हम महात्मा गाँधी Mahatma Gandhi के नाम से जानते है |

Mahatma Gandhi
नाममोहनदास करमचंद गांधी
जन्म तिथि2 अक्टूबर 1869
जन्म स्थानपोरबंदर, गुजरात, भारत
पिता का नामकरमचंद गांधी
माता का नामपुतलीबाई
पत्नी का नामकस्तुरबा गांधी
शिक्षावेस्लीयान मिशन स्कूल, लंदन
प्रमुख आंदोलननॉन-कोअपरेशन आंदोलन
विचारधारासत्याग्रह, अहिंसा
महत्वपूर्ण कार्यडांडी मार्च
मृत्यु तिथि30 जनवरी 1948
मृत्यु स्थाननई दिल्ली, भारत

Mahatma Gandhi-महात्मा गाँधी का जीवन परिचय

Mahatma Gandhi जी शांत सत्य अहिंसा के मार्ग पर चलते थे उनका जीवन बहुत सरल था, हमेशा गीता हाथ में रहती थी गाँधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था , (Mahatma Gandhi) गाँधी जी का जन्म 2 अक्टूवर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था, पिता जी का नाम कर्मचंद गाँधी और माता का नाम पुतली बाई था, पुतली बाई कर्मचंद की चौथी पत्नी थी, करमचंद गाँधी जी की तीन पत्नियों का निधन प्रसव के दौरान ही हो गया था,

गाँधी जी का विवाह तब हुआ जब वह 14 वर्ष के थे और कस्तुरवा जी 13 वर्ष की थी, गाँधी जी के चार पुत्र हुए जिनके नाम हरीलाल,मनीलाल,रामदास,देवदास था, गाँधी जी अपने जीवन में साधारण विचार रखते थे, शाकाहारी भोजन, हफ्ते में एक दिन उपवास रखना प्रतिदिन गीता पड़ते थे l

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भारत की आज़ादी में Mahatma Gandhi का महत्व

Mahatma Gandhi-महात्मा गाँधी जी आदर्शो पर चलते थे, गाँधी जी हिंसा के विरोधी थे महात्मा गाँधी जी ने अपने पुरे जीवन में सत्य, अहिंसा और सदभाव जैसे आदर्श शव्दों का पालन किया है,

मोहनदास करमचंद गांधी जी को लोग बापू के रूप में भी जाने जाते हैं, भारतीय आजादी के लिए एक महत्वपूर्ण और प्रमुख योगदानकर्ता थे। उनके विचारधारा और क्रियाएं न सिर्फ लोगों को जागरूक करने में मदद करती थी , बल्कि वे एक प्रेरणास्रोत बने, जिनसे लाखों लोग उनके मार्गदर्शन में चले और स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान दिया।

गांधी जी ने नॉन-कोअपरेशन आंदोलन, असहयोग आंदोलन, और अल्पकालीन आंदोलन जैसे अनेक आंदोलनों के आध्यात्मिक नेता के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी अहिंसा और सत्याग्रह की सिद्धांतों ने देशभक्तों को प्रेरित किया और उन्हें शांतिपूर्ण और अहिंसापूर्ण संघर्ष करने की शक्ति दी। वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की सफलता में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता थे।

Mahatma Gandhi जी का अहिंसा के सिद्धांत पर आधारित सत्याग्रह उनका महान योगदान था। उन्होंने लोगों को शक्तिशाली होने और अपने अधिकारों के लिए स्वयं खड़े होने की प्रेरणा दी। डांडी मार्च, जिसमें उन्होंने नमक का अवैध उत्पादन किया था, देशभर में आंदोलन का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया। इसके पश्चात्, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन गतिमान रूप से गति प्राप्त करने लगा और ब्रिटिश साम्राज्य को अंतिम धक्का दिया।

गांधी जी की विचारधारा और अहिंसा के सिद्धांत आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं। उनका योगदान भारतीय इतिहास के ऐतिहासिक पलों में महत्वपूर्ण है और उन्हें एक महान नेता के रूप में स्मरण किया जाता है, जिनके माध्यम से हमारा देश के लोगो में स्वतंत्रता प्राप्त करने की प्रेरणा जागी थी|

Mahatma Gandhi-महात्मा गाँधी जी की शिक्षा

स्तरपढ़ाई की स्थान
प्राथमिकपोरबंदर, गुजरात
माध्यमिकराजकोट, गुजरात
उच्चतर माध्यमिकमुंबई, महाराष्ट्र
स्नातकलंदन, यूनाइटेड किंगडम
वकालती पढ़ाईमुंबई, यूनाइटेड किंगडम
वकालती प्रशिक्षणलंदन, यूनाइटेड किंगडम
महात्मा गाँधी जी शिक्षा में बहुत अच्छे थे उन्होंने कक्षा दश ,और इंटर मिडियत गुजरात से और स्नातक लन्दन से किया था बकील की शिक्षा लेने के लिए मुबई और यूनाइटेड किंगडम और बकालती का अभ्यास लंदन, यूनाइटेड किंगडम से किया था
BHAGAT SINGH 1

महात्मा गाँधी जी द्वारा किये गए आन्दोलन

महात्मा गाँधी जी ने आन्दोलन का प्रारम्भ दक्षिण अफ्रीका से बकील के रूप में शुरु की वहा से भारत लौट कर भारत में अंग्रेजो के खिलाफ आन्दोलन शुरु कर दिया 1919 में रोलेट एक्ट के खिलाफ सत्याग्रह,1920-1922 खिलाफत आंदोलन जैसे कई आन्दोलन शुरु किये कुछ आन्दोलन पुरे हुए तो कुछ अधूरे रह गए गाँधी जी के साथ कई देश भक्तो ने अपनी जिंदगी दाव पर लगा दी भारत में आकार गाँधी जी भारतीय कोंग्रेश पार्टी का नेतृत्व करते नजर आये

आंदोलनतिथि
रोलेट एक्ट के खिलाफ सत्याग्रह1919
खिलाफत आंदोलन1920-1922
नॉन-कोअपरेशन आंदोलन1920-1922
चौरी-चौरा आंदोलन1922
सॉल्ट सत्याग्रह1930
भारत छोड़ो आंदोलन1942
यहां एक टेबल में मोहनदास करमचंद गांधी जी की प्रमुख आंदोलन और उनकी तिथियां दी गई हैं। इससे आपको गांधी जी के महत्वपूर्ण आंदोलनों की जानकारी मिलेगी।

गाँधी का गर्म दल पर प्रभाव

मोहनदास करमचंद गांधी के गरम दल (Garam Dal) पर प्रभाव भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण रहा है। गरम दल एक गुप्त समिति थी जो गांधी जी द्वारा बनाई गई थी और स्वतंत्रता संग्राम की नीति निर्धारित करने के लिए काम करती थी। यह समिति उन विशेष लोगों से मिलकर बनाई गई थी जो गांधी जी की नेतृत्व में अहिंसा, सत्याग्रह, स्वदेशी और अन्य गैर-कार्यकर्ता आंदोलनों के प्रति समर्पित थे।

गरम दल का प्रमुख उद्देश्य अंग्रेजी सरकार के खिलाफ गुप्त और असंगठित प्रतिरोध की योजनाओं का निर्माण करना था। यह गांधी जी की विचारधारा और अहिंसा के सिद्धांतों पर आधारित था। गरम दल के सदस्यों ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ असंगठित सत्याग्रह और अनुशासित कार्यवाही के माध्यम से अपना प्रभाव दिखाया। इसमें समाजिक विरोध, अशांति को शांतिपूर्णता में बदलने के लिए प्रयास किए गए और अंग्रेजी राज के खिलाफ जनसमर्थन और सहयोग का मार्ग चुना |

महात्मा गाँधी जी के आदर्श

मोहनदास करमचंद गांधी के सिद्धांतों का मूल आधार उनकी आध्यात्मिकता, अहिंसा, सत्याग्रह, स्वदेशी, सादगी और सर्वोदय के आदर्शों पर आधारित था। यहां कुछ मुख्य सिद्धांतों का वर्णन किया गया है:

  1. अहिंसा (Non-violence): गांधी जी का महत्वपूर्ण सिद्धांत अहिंसा था। उनका मानना था कि हिंसा कभी भी समस्याओं का समाधान नहीं हो सकती है और अहिंसा ही समरसता और शांति का मार्ग है।
  2. सत्याग्रह (Truth and Non-violent Resistance): गांधी जी ने सत्याग्रह को एक प्रभावी और अहिंसापूर्ण संघर्ष का माध्यम माना। इसे सत्य और न्याय की रक्षा के लिए उठाया जाता है।
  3. स्वदेशी (Self-sufficiency): गांधी जी का महत्वपूर्ण सिद्धांत स्वदेशी था। उन्होंने भारतीय उद्योगों की समर्थन किया और विदेशी वस्त्रों की अपने देश के उत्पादन के साथ प्रतिस्पर्धा करने की प्रेरणा दी।
  4. सादगी (Simplicity): गांधी जी ने सादगी को अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना। उन्होंने यह सिद्धांत अपनाया कि मानवीय सुख और पूर्णता सादगी में हैं और अतिरिक्त वस्तुओं की आवश्यकता कम होनी चाहिए।
  5. सर्वोदय (Welfare of All): गांधी जी का लक्ष्य समाज के सभी वर्गों के कल्याण का था। उन्होंने न्याय, सामरिकता और समानता की महत्वपूर्णता पर बल दिया और विभाजन और भेदभाव के खिलाफ लड़ाई लड़ी।

ये सिद्धांत गांधी जी के चिंतन के मध्य एक महत्वपूर्ण स्थान रखते थे और उनके नेतृत्व में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान किया।

गाँधी जी का राजनितिक जीवन

मोहनदास करमचंद गांधी का राजनितिक जीवन व्यापक और महत्वपूर्ण रहा है। गांधी जी को ‘राष्ट्रपिता’ के रूप में मान्यता प्राप्त है, क्योंकि उन्होंने अपने जीवनभर समाज, राष्ट्र और मानवता के लिए समर्पित कार्य किए हैं। यहां कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन किया गया है जो गांधी जी के राजनितिक जीवन की महत्वपूर्ण चरणों को दर्शाती हैं:

  1. सत्याग्रह आंदोलन: गांधी जी ने अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों पर आधारित कई आंदोलन चलाएं। उन्होंने राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों के लिए असहिष्णुता के खिलाफ सत्याग्रह आंदोलन का प्रचार किया।
  2. खिलाफत आंदोलन: गांधी जी ने खिलाफत आंदोलन का समर्थन किया, जिसमें वे हिंदू-मुस्लिम एकता को स्थापित करने के लिए मध्यस्थता की ओर प्रयास किए।
  3. नॉन-कोऑपरेशन आंदोलन: 1920 में, गांधी जी ने नॉन-कोऑपरेशन आंदोलन की शुरुआत की, जिसमें वे अंग्रेजी सरकार के खिलाफ आंदोलन और विदेशी वस्त्रों के विरोध में लोगों को उकसाने का आह्वान किया।
  4. दण्डी मार्च: 1930 में, गांधी जी ने नमक अधिकार आंदोलन के तहत दण्डी मार्च आयोजित किया, जिसमें उन्होंने दण्डी में खुद ही नमक बनाने की कार्रवाई की, जो अंग्रेजी सरकार के कर नियमों का उल्लंघन करने का रूप था।
  5. भारत चोड़ो आंदोलन: 1942 में, गांधी जी ने ‘भारत चोड़ो आंदोलन’ शुरू किया, जिसमें उन्होंने ब्रिटिश सरकार को भारत से अधिकार वापस लेने के लिए आह्वान किया।

ये आंदोलन और क्रांतिकारी कार्य गांधी जी के राजनितिक जीवन के महत्वपूर्ण हिस्से रहे हैं, जिनके माध्यम से उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता की लड़ाई में अहम योगदान दिया।

महात्मा गाँधी जी की मृत्यु

मोहनदास करमचंद गांधी की मृत्यु 30 जनवरी, 1948 को नई दिल्ली के भारतीय राष्ट्रीय बाग में हुई थी। उन्हें नाथूराम गोडसे नामक एक व्यक्ति ने नई दिल्ली में गोली मार कर हत्या कर दी थी । गोडसे ने गांधी जी को विवादित रूप से उनके समर्थन के लिए पाखंडी मानते हुए उनकी हत्या की थी। उन्हें गांधी जी के द्वारा चलाए जा रहे पश्चिमी शैली के समाज सुधार कार्यों से भी असंतुष्टि थी। हत्या के बाद गोडसे ने अपनी कार्रवाई के पीछे धार्मिक और राजनीतिक मोटिवेशन को दर्शाने की कोशिश की थी। गोडसे को बाद में गिरफ्तार किया गया और उन्हें फांसी की सजा हो गई।

गांधी जी की मृत्यु ने देश और विश्व में गहरी शोक की भावना पैदा की और उनके विचारों और आंदोलनों की अनमोल विरासत को जीवित रखने में मदद की। उनकी मृत्यु ने भारत को एक विश्वविख्यात धरोहर दी, जिसका प्रभाव आज भी देश की राजनीति, समाज, और संस्कृति पर दिखता है।

महात्मा गाँधी जी का भारत पर प्रभाव

बर्तमान में गांधी जी का भारत में एक महत्वपूर्ण प्रभाव है। वे आज भी एक राष्ट्रीय और आंतर्राष्ट्रीय महानायक के रूप में मान्यता प्राप्त हैं और उनके विचार और सिद्धांत आज भी लोगों के दिलों और मस्तिष्कों में बसे हुए हैं।

यहां कुछ क्षेत्रों में गांधी जी का प्रभाव दिखाया गया है:

  1. अहिंसा और सत्याग्रह: गांधी जी के अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांत आज भी व्यापक प्रभाव रखते हैं। उनका अहिंसा का सिद्धांत और उनकी अपार्थिविकता ने लोगों को आपसी विवादों को शांति से हल करने की प्रेरणा दी है।
  2. सामरिकता और समानता: गांधी जी ने सामरिकता और समानता के महत्व को प्रभावशाली रूप से बताया। उन्होंने विभाजन, जातिवाद और भेदभाव के खिलाफ लड़ाई लड़ी और समाज में समानता को स्थापित करने के लिए कठिन परिश्रम किया। आज भी उनके विचारों का प्रभाव विभिन्न वर्गों के लोगों के बीच सामरिकता और समानता को प्रोत्साहित करने में दिखाई देता है।
  3. ग्रामीण विकास: गांधी जी का ग्रामीण विकास पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव है। उन्होंने ग्रामीण स्वराज, ग्राम स्वदेशी, ग्रामोदय आदि के मुद्दों पर जोर दिया और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए अपार प्रयास किये। उनकी विचारधारा और कार्यों के प्रभाव से ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता, स्वावलंबन, और सामरिक गतिविधियाँ बढ़ी हैं।
  4. स्वच्छता अभियान: गांधी जी का स्वच्छता के प्रति समर्पण और स्वच्छ भारत अभियान पर प्रभाव बहुत है। उन्होंने स्वच्छता को स्वयं सेवा का हिस्सा माना और इसे सामाजिक सुधार का एक महत्वपूर्ण आयाम बनाया।

यह कुछ बाते गाँधी जी के जीवन और विचारधारा को दर्शाती है जो देश के सभी वर्गों को प्रेरित करती है साथ ही देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

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Bhagat Singh

Bhagat Singh – शहीद सरदार भगत सिंह जीवन परिचय

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मेरे लहू का हर एक कतरा इन्कलाब लायेगा

मेरा देश मुझे बुला रहा है पिस्तौल और बम से इन्कलाब नही आता,
हमारे अपने विचारो से इन्कलाब आता है, यह समय मेरी शादी का नही है मेरा जन्म देश की आजादी के लिए है l

देश भक्ति तो हर किसी के मन में होती है लेकिन देश के लिए मर मिटने का जूनून हर किसी में नही होता इस प्रकार का जूनून कुछ गिने चुने लोगो में होता है उनमे से थे हमारे सभी के दिलो की शान शहीद सरदार भगत सिंह | आइये जानते है इनके जीवन के बारे में……

Bhagat Singh
Bhagat Singh

भगत सिंह का जीवन परिचय

Bhagat Singh एक साधारण सिख परिवार से आते है इनका जन्म 28 सितम्वर 1907 को पंजाब के एक किसान परिवार में हुआ था, भगत सिंह के पिता जी का नाम सरदार किशन सिंह और माता जी का नाम विधावती कौर था,

शहीद की देश के प्रति देश भक्ति औरो से अपेक्षा जनक अधिक थी भगत सिंह का मनना था की देश को आजाद करने के लिए सिर्फ नरम दल से कुछ नही होगा हमें अंग्रेजो को दिखाना पड़ेगा हम भारतीय देश के लिए अपने प्राण भी त्याग सकते है l

पूरा नामभगत सिंह
जन्म तिथि28 सितंबर, 1907
जन्म स्थानबंगा, पंजाब, ब्रिटिश भारत
माता-पिताकिशन सिंह (पिता) और विद्यावती देवी (माता)
शिक्षानेशनल कॉलेज, लाहौर
राजनीतिक जुड़ावहिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA)
क्रांतिकारी गतिविधियाँ– युवा क्रांतिकारी आंदोलन में हिस्सा लेना। ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सौंडर्स की हत्या में सहभागी होना। दिल्ली के केंद्रीय विधानसभा में बम फेंककर कठोर कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करना। ब्रिटिश शासन से पूर्ण स्वराज के पक्षधर होना।
कैद8 अप्रैल, 1929 को गिरफ्तार किया गया। जॉन सौंडर्स की हत्या के लिए उम्रकैद की सजा पाई। कैद के दौरान विभिन्न कारागार में भेजा गया।
विचारधारासमाजवाद, कम्यूनिज्म, और अराजकता
प्रभावभारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में प्रमुख आदर्श माना जाता है। अपनी लेखनी और कार्यों के माध्यम से कई क्रांतिकारियों और कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया।
फांसी23 मार्च, 1931 को लाहौर केंद्रीय जेल में 23 वर्ष की आयु में फांसी दी गई।
उपनगरीएक शहीद और विद्रोह के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है। उनके विचार और बलिदान ने स्वतंत्रता की लड़ाई में अनेक पीढ़ियों को प्रेरित किया है।

Bhagat Singh की देश के प्रति देश भक्ति

भारत पर अंग्रेजो की हुकूमत थी 1857 में प्लासी के युद्ध के बाद अंग्रेजी हुकुमत पूरी तरह से कायम हो गई थी भारत से कच्छा माल सस्ते में लेते थे और इग्लैंड में महगी दरो पर बेचते थे भारतीय मजदूरो पर जम कर अत्याचार करते थे

जलिया बाला बाग हत्या कांड से Bhagat Singh के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा यहाँ से इन्होने देश को आजाद करने का प्रण लिया और चन्द्र शेखर द्वारा बनाये गए दल में हिस्सा लिया और चन्द्र शेखर के कदमो पर भारत को आज़ादी की तरफ ले चले |

Bhagat Singh की देश के प्रति क्रांतिकारी गतिविधि

Bhagat Singh के जीवन पर जलिया वाले बाग हत्या कांड का ऐसा असर हुआ की उन्होंने अपना जीवन देश के प्रति समर्पित कर दिया चन्द्र शेकर आजाद के कदमो पर चलने लगे और कई जुलूसो में सामिल होने लगे  भगत सिंह शुरु से अपने चाचा के करांतिकारी कार्यो को सुनते थे, और किताबो और समाचार पत्र ,पत्रिकाओ में पड़ते थे महात्मा गाँधी जी के असहयोग आन्दोलन में इन्होने अपनी सहमति जताई लेकिन जब गाँधी जी ने आन्दोलन बापस लिया तो भगत को अच्छा नही लगा और उन्होंने गरम दल में सामिल हो गये l

काकोरी कांड के बाद 4 को फाँसी और 16 को कारावास दी गई तो भगत ने अपनी एक पार्टी बनाई जिसमे भगत सिंह ,लाला लाजपत राय, सुखदेव, राजगुरु जैसे करान्तिकरियो को अपने साथ सामिल किया l

कुछ समय बाद लाला लाजपत ने साइमन बहिस्कार के लिए आन्दोलन में हिस्सा लिया , उस आन्दोलन में साइमन ने लाठी चार्ज शुरु करा दिया, जिसकी बजह से लाला लाजपत की मृत्यु हो गई, जिसका बदला लेने के लिए भगत द्वारा साजिस रचाई गई और पूरी तैयारी के साथ भगत और उनके सथियों ने मिलकर साइमन को गोली मार दी और अपना प्रतिशोध पूरा किया l

अंग्रेजी असेम्बली में बम फेकना 

Bhagat Singh का मानना था की अंग्रेज अहिंसा से नही मानेगे इनको बताना पड़ेगा भारतीय लोग जाग चुके है और अब अंग्रेजो का यह जुल्म नही सहेगे और हर उस कानून का विरोध करेगे जो उनके हित के लिए नही होगा, इसी सोच को अंग्रेजो के मन में डालने के लिए भगत सिंह ने असेम्बली में बम फेकने की योजना बनाई,

7 अप्रैल 1921 को अंग्रेजी असेम्बली में बम फेका उसमे किसी की जान नही गई क्यों की भगत सिंह चाहते थे की किसी की जान न जाये और हमारी आवाज सबके पास चली जाये और बम फेकने के बाद इन्कलाब जिंदाबाद के नारे लगाने शुरु कर  दिए l

Bhagat Singh
Bhagat Singh को अंग्रेजो द्वारा फासी दी गई

भगत सिंह लगभग 2 साल जेल में रहे और अपने जेल में रहते हुए भी अपने विचारो और देश भक्ति काव्य से उन सबका विरोध किया जो भारतीय मजदूर पर अत्याचार करते थे, जेल में उन्होंने कई पूंजीवादी और अंग्रेजो को अपना शत्रु बताया जो भारतीय लोगो पर अत्याचार करते है l

जेल में रहकर उन्होंने भूख हड़ताल भी की इसी बजह से उनका एक साथी भूख हड़ताल में मारा गया इसी बीच भगत सिंह और उनके दो साथी को फांसी की सजा सुनाई गई, फाँसी की सजा माफ़ करने के लिए कई याचिका दर्ज की लेकिन सभी याचिका को ख़ारिज कर दिया गया, पुरे भारत में धारा 144 लागू करने के पश्चात् 23 मार्च 1931 को शाम 7 बजे सुखदेव, भगत सिंह और राजगुरु को फाँसी दे दी गई !

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