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Amogh Lila Prabhu Biography

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Amogh Lila Prabhu – अमोघ लीला प्रभु

Amogh Lila Prabhu 2

युगों–युगों से बहुत से संत गुरु की कहानियों को हम सुनते आए हैं। जिन्होंने अपनी बेहद ऐशो–आराम की जिंदगी को छोड़ कर, एक संत गुरु बनने का रास्ता चुना हैं। और इनके जीवन का मकसद होता हैं। की वह आज के युवाओ को अपने उद्देश्य और भागवत गीता के श्लोक से सही रास्ता दिखाएं व समाज के हित के लिए कार्य करे। आज एक ऐसे ही संत गुरु है जिन्होंने छोटी सी उम्र में ही आध्यात्मिक रास्ता चुना और समाज के हित के लिए कार्य करना शुरू किया और साथ ही साथ युवाओ को उनके सपनो के लिए प्रेरित और उनको सही रास्ता दिखाना का रास्ता चुना ।

Amogh Lila Prabhu संत का जीवन परिचय

आज का लेख अमोघ लीला प्रभु (Amogh Lila Prabhu) के जीवन पर है जो आज युवाओ को सही रास्ता दिखा कर मार्गदर्शन का काम कर रहे हैं। अमोघ लीला प्रभु जिन्हे आज लोग संत गुरु के रूप में जानते है। जिनका असली नाम आशीष अरोड़ा (Ashish Arora) है जिनका जन्म 1 जुलाई 1980 में पंजाबी परिवार में लखनऊ, उत्तर प्रदेश (Lucknow, Uttar Pradesh) में हुआ था । जो आज वर्तमान में इस्कॉन द्वारका (ISKON) में उपाध्यक्ष है इनके परिवार में इनके माता–पिता व इनकी दो बहने हैं जो शादी शुदा है। इनके पिता रॉ एजेंट थे जो रिटायर हो चुके है।

निकल पड़े भगवान की तलाश में
अमोघ प्रभु जी बचपन से ही पढ़ाई में तेज थे। उन्हे पढ़ना काफी अच्छा लगता था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा मिजोरम, गंगटोक डार्जेलिंग से की। क्योंकि इनके पिता की नौकरी होने के कारण उनकी बदली कई जगह पर हुआ करती थी जिसको लेकर उन्हे अपनी पढ़ाई भी अलग अलग जगह से करनी पड़ती थी। लेकिन उनके जीवन में एक ऐसा मोड़ आया की वो घर छोड़ कर भगवान को ढूंढने के लिए निकल पड़े।

क्योंकि अमोघ प्रभु जी का कहना था की एक बार उनकी कक्षा में उनकी पुस्तक में गीता के सात श्लोक थे जिसमे लिखा था की मन बहुत चंचल और बलवान है जो किसी की नहीं सुनता। यह पढ़ कर उनके मन में कई सवाल उठे। जिसके जवाब के लिए उन्होंने अपनी अध्यापिका से पूछा, तो उनकी अध्यपिका ने बताया की ये श्री मत भागवत के सात श्लोक है और भागवत गीता में 700 श्लोक का वर्णन हैं।

जब उन्होंने यह सुना तो उन्हे लगा की सात श्लोक पढ़ कर उन्हे अपने मन की बात का एहसास और उनके जीवन का वर्णन हो सकता हैं। जिसके बाद उनके मन में भगवान को ढूंढने की इच्छा उत्पन्न हुई और वह उस समय 12 वी कक्षा में थे जब वह घर से बिना बताए भगवान को अलग–अलग जगह पे जाकर ढूंढने लगे। जिसमे वह 4 महीने अपने घर से दूर रहे,अंत में उन्हे अपने प्रश्न के उतर इस्कॉन द्वारका मंदिर में मिले।

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Amogh Lila Prabhu

ISKON में जाकर ढूंढा भगवान को Amogh Lila Prabhu ने

जब उन्हे कही भी भगवान के दर्शन नहीं हुए। जैसे की हमने जाना की अमोघ प्रभु जी को छोटी उम्र में ही आध्यात्मिक चीज़ों से काफी लगाव था। तब उन्हे एक भगवत गीता पढ़ने को मिली जो प्रभुपाद के द्वारा लिखी गई थी जिसे पढ़ने के बाद इन्हें कई चीज़ों के बारे में पढ़ा। उन्होंने जाना की जिस किसी भी व्यक्ति ने इसे लिखा है वे कृष्ण भगवान के बेहद करीब हैं। जिसके बाद उन्होंने प्रभुपाद के प्रवचन को भी सुना। और बाद वो कैलाश द्वारका इस्कॉन मंदिर में जा पहुंचे जहा उन्होंने 3 महीने तक भ्रमचारी के रूप में व्यतीत किए। जिसके बाद जैसे ही वहा के संतो को आभास हुआ कि अमोघ प्रभु जी अपने घर से बिना बताए आए, तो तुरंत उनके माता पिता को वहा बुलाया गया। जिसके बाद अमोघ प्रभु जी अपने घर वापिस लोटे।

पूर्ण की स्नातक की डिग्री
जब वह इस्कॉन के मंदिर से वापिस अपने घर पहुंचे तो, उन्होंने अपने पढ़ाई को दुबारा से शुरू किया। जिसमे उन्होंने अपनी सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की डिग्री को दिल्ली से हासिल किया। वह अपनी कक्षा के तेज बच्चे होने के कारण बिना एंट्रेंस दिए उन्हे मास्टर की डिग्री हासिल करने का मौका दिया। लेकिन उन्होंने उस मौके को ठुकरा कर नौकरी करना शुरू किया। जिसके बाद उन्होंने 2004 से 2010 तक अपनी नौकरी की। लेकिन आध्यात्मिक में रुचि होने के कारण उन्हें अपनी नौकरी रास नही आई और 2010 में नौकरी छोड़ वापिस इस्कॉन द्वारका के लिए निकल पड़े। और जिंदगी भर के लिए ब्रह्मचारी बन गए। जिसके बाद उन्होंने अपनी जिंदगी को श्री कृष्ण और लोगो के लिए जागरूकता लाने की लिए समर्पित कर दिया।

आज अमोघ प्रभु जी (Amogh Lila Prabhu) का यूट्यूब पर चैनल भी हैं जहा लोग उनके प्रवचनों को सुनते हैं। और साथ ही साथ प्रभु जी की इंस्टाग्राम पर भी आईडी (ID) है। जहा लोग उन्हे फॉलो कर उनके विचारो को पढ़ कर उनको अपनी जिंदगी में लागू करने की कोशिश करते हैं।

अमोघ प्रभु जी के गुरु

अमोघ प्रभु जी के गुरु जिनसे उन्होंने अपनी धार्मिक शिक्षा को ग्रहण किया, और आध्यात्मिक पुस्तको की शिक्षा भी ग्रहण की। कहा जाता है की अमोघ प्रभु जी श्री प्रभुपाद से अपनी धार्मिक शिक्षा लेना चाहते थे। क्योंकि उन्होंने उनके कई प्रवचनो को सुना था जिसके बाद उन्हें श्री कृष्ण जी को जानने की काफी इच्छा जागरूक हुई। लेकिन श्री प्रभुपाद ने शिक्षा देने से पहले ही अपना शारीर त्याग दिया था। जिसके चलते अमोघ प्रभु जी ने अपनी धार्मिक शिक्षा गुरु गोपाल कृष्ण जी से पूरी की।

आखिर इस्कॉन (ISKON) क्या है
इस्कॉन (ISKON) की स्थापना स्वामी प्रभुनंद ने की थी। ISKON जिसका नाम International Society for Krishna Consciousness है यह वो जगह है जो काफी पवित्र है जहाँ दूर दूर से लोग अपनी मनोकामना को पूरा करने आते हैं और श्री कृष्ण भगवान के दर्शन करते है। इस्कॉन मंदिर की स्थापना श्री प्रभुनंद ने भारत में ही नहीं विश्व में भी की है जैसे की अमेरिका, कनाडा इंग्लैंड आदि। इस मंदिर का एक पावन भजन है जो अक्सर लोगो को गाते हुए देखा हैं। हरे रामा हरे रामा कृष्ण, जो काफी विदेशी लोगो भी गुनगुनाते हुए देखा गया हैं।

अमोघ प्रभु जी की श्री कृष्ण में काफी मानते है व उनके द्वारा की गई भक्ति बेहद सच्ची और पवित्र है। आज अमोघ जी श्री मत भागवत गीता से आज के युवाओ को जिंदगी जीने का सही तरीका सिखाने के साथ ही साथ उन्हे उनके लक्ष्य को हासिल करने के लिए मोटिवेट भी करते हैं।

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